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शिक्षा मनोविज्ञान आवश्यक है – शिक्षा एवं अभिभावकों के लिए
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शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य सम्बन्ध सिखने से है l यह कथन है – सॉरे एवं टेलफ़ोर्ड का
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मनोविज्ञान की आधारशिला किस पुस्तक में राखी गई- मनोविज्ञान के सिद्धान्त
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अमेरिका में प्रकाशित ‘Principal
of Psychology’ के लेखक हैं – विलियम जेम्स
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शिक्षा मनोविज्ञान का वर्तमान स्वरुप है – व्यापक
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गौरिसन के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान का उदेश्य है – व्यवहार का ज्ञान
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कुप्पूस्वामी के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्धांन्तों का सर्वोत्तम प्रयोग होता है – उत्तम शिक्षा एवं उत्तमअधिगम में
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शिक्षा मनोविज्ञान का प्रमुख उदेश्य कोलेसनिक के अनुसार है – शिक्षा की समस्याओं का समाधान करना
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कैली के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान के उदेश्य हैं – नौ
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स्किनर के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान के सामान्य उदेश्य हैं – बाल विकास
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स्किनर के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान के विशिष्ट उदेश्य हैं – बालकों के वांछनीय व्यवहार के अनुरूपशिक्षा के स्तर एवं उदेश्यों को निचित करने में सहायता करना
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शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र में वह सभी ज्ञान और विधियां सम्मिलित हैं जो सिखने की प्रक्रिया से अधिक अच्छी प्रकार समझने में सहायक हैं l यह कथन है – ली का
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गेट्स के अनुसार शिक्षा मनोविज्ञान की सिमा है – अस्थिर एवं परिवर्तनशील
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“अवस्था विशेष के आधार पर ही हमें किसी को बालक युवा या वृद्ध कहना चाहिए l ” यह कथन है – फ़्रॉबेल का
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हरबर्ट के अनुसार शिक्षा सिद्धान्तों का आधार होना चाहिए – मनोविज्ञानिक
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माण्टेसरी के अनुसार एक अध्यापक द्वारा उस स्थिति में ही शिक्षण कार्य प्रभावी ढंग से किया जा सकता है, जब उसे ज्ञान होगा – मनोविज्ञान के प्रयोगात्मक स्वरुप का
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वर्तमान समय में शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्यकता है – बाल केन्द्रित शिक्षा
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वर्तमान समय में शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्यकता समझी जाती है – सर्वांगीण विकास में
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शिक्षा मनोविज्ञान का प्रमुख लाभ है – शिक्षक शिक्षार्थी मधुर संम्बन्ध
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कक्षा में छात्रों को उनकी विभिन्नताओं के आधार पर पहचानने के लिए शिक्षक को ज्ञान होना चाहिए – शिक्षा मनोविज्ञान का
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समय सरणी में गणित, विज्ञान या कठिन विषय के कालांश पहले क्यों रखे जाते हैं – मनोविज्ञान केआधार पर
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सफल एवं प्रभावशाली शिक्षा अधिगम प्रक्रिया के लिए आवश्यक है– शिक्षण अधिगम सामग्री का प्रयोगएवं शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्धान्तों का प्रयोग
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निर्देशन एवं परामर्श में किस विषय का अधिक उपयोग किया जाता है – शिक्षा मनोविज्ञान का
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छात्रों की योग्यता एवं रूचि के आधार पर पठ्यक्रम निर्माण में योगदान होता है – शिक्षा मनोविज्ञान का
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बुद्धि परीक्षण विषय है – शिक्षा मनोविज्ञान का
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शिक्षक मनोविज्ञान के ज्ञान द्वारा बालकों की – बुद्धि तथा रुचियों की जानकारी करके शिक्षा देता है
, प्रकृति को जान कर शिक्षा देता है और आर्थिक स्तिथि तथा पारिवारिक स्थिति की जानकारी लेकर शिक्षादेता है
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मनोविज्ञान का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान है – अब शिक्षा बाल केन्द्रित हो गई है
, शिक्षक बालकों सेनिकट का संम्पर्क स्थापित करने का प्रयास करता है और शिक्षक को छात्रों की आवश्यकता का ज्ञान होसकता है
l
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शिक्षा मनोविज्ञान एक विज्ञान है – शैक्षिक सिद्धान्तों का
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शिक्षा मनोविज्ञान की उत्पति मानी जाती है – वर्ष 1900
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‘मनोविज्ञान’ शब्द के समांनान्तर अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘साइकोलॉजी’ की व्युत्पत्ति किस भाषा से हुई है – ग्रीक भाषा से
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शिक्षा मनोविज्ञान का सम्बन्ध है – शिक्षा से
, दर्शन से और मनोविज्ञान से
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शिक्षा का शाब्दिक अर्थ है – पालन–पोषण करना , सामने लाना और नेत्रित्व देना
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“मनोविज्ञान वातावरण के सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों के क्रियाकलापों का विज्ञान है l ” यह कथन है – वुडवर्थ का
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“मनोविज्ञान शिक्षा का आधारभूत विज्ञान है ” यह कथन है – स्किनर का
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शिक्षा मनोविज्ञान की विषय – सामग्री का सम्बन्ध है – सीखना
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शिक्षा मनोविज्ञान में जिन बालकों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है, वह है – मंध बुद्धि,
पिछड़े हुएऔर समस्यात्मक
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सिखने की प्रक्रिया के अन्तर्गत शिक्षा मनोविज्ञान अध्ययन करता है – प्रेरणा व् पुर्नबलन के प्रभाव काअध्ययन
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“मनोविज्ञान मन का विज्ञान है l ” यह कथन है – अरस्तू का
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“शिक्षा मनोविज्ञान, अधियापको की तैयारी की आधारशिला है l यह कथन है – स्किनर का
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आंकड़ों का व्यवस्थापन करने हेतु संकलित आंकड़ों के संबन्ध में निम्नलिखित कार्य करना होता है – वर्गीकरण , सारणीयन,
आलेखी निरूपण
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मनोविज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में सहायता देता है तथा बताता है – शिक्षा के उदेश्य सम्भावित हैं अथवा नहीं
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शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन अध्यापक को इसलिए करना चाहिए , ताकि – इसकी सहायता से अपनेशिक्षण को अधिक प्रभावशाली बना सके
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“मनोविज्ञान व्यवहार का शुद्ध विज्ञान है ल” इस परिभाषा के प्रतिपादक हैं– ई० वाटसन
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अचेतन मन का अध्ययन किया जाता है– मनोविश्लेषण विधियों द्वारा
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मनोविश्लेषणात्मक प्रणाली के जन्मदाता हैं – सिंगमण्ड फ्राइड
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वर्तमान समय में मनोविज्ञान है– व्यवहार का विज्ञान
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शिक्षा मनोविज्ञान का विषय क्षेत्र नहीं है – शैक्षिक मूल्यांकन
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‘शिक्षा किसी निश्चित स्थान पर प्राप्त की जाती है l ‘ यह कथन शिक्षा के किस अर्थ में प्रयुक्त होता है – शिक्षा का संकुचित अर्थ
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‘साइकी’ का अर्थ है – मानवीय आत्मा या मन
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मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञानं कहा– वाटसन ने
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“मनोविज्ञान मन का वैज्ञानिक अध्ययन है , जिसके अन्तर्गत न केवल बौद्धिक, अपितु संवेगात्मक अनुभूतियों , उत्प्रेरक शक्तियों तथा कार्य या व्यवहार भी सम्मिलित है l ” यह कथन है – सी० डब्ल्यू०वैलेंटाइन का
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मनोविज्ञान – आत्मा का विज्ञान है
,मन का विज्ञान है
, चेतना का विज्ञान है
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मानव मन को प्रभावित करने वाला करक है – व्यक्ति की रुचियाँ , अभिक्षमताए अभियोग्यताए व्वातावरण है
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मनोविज्ञान को शुद्ध विज्ञान मन है – जेम्स ड्रेवर ने
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शिक्षा मनोविज्ञान – मनोविज्ञान का एक अंग है
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शिक्षा मनोविज्ञान की पकृति से सम्बन्ध में कहा जा सकता है – यह सर्वव्यापी है तो सार्वभौमिक भी
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मनोविज्ञान के अंतर्गत – मानव का अध्ययन किया जाता है
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शिक्षा मनोविज्ञान के अध्य्यन के उदेश्य है – विद्यार्थियों द्वारा किसी बात के सीखे जाने को प्रभावित करना
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मनोविज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में सहायता देता है तथा स्पष्ट करता है – शिक्षा के उदेश्य की सम्भावना
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शिक्षक को शिक्षा मनोविज्ञान के अध्य्यन की प्रत्यक्ष आवश्यकता नहीं है – शारीरिक सुडौलता
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मनोइयाँ का सम्बन्ध प्राणिमात्र के व्यवहार के अध्ययन से है, जबकि शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र – मानवीयव्यवहार के अध्य्यन से है
, शैक्षिक संस्थितियों में मानव व्यवहार से है
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शिक्षण प्रक्रिया के अंग है – शिक्षण के उदेश्य , शिक्षण को सार्थक बनाने वाले ज्ञानानुभव
, शिक्षण कामूल्यांकन
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शिक्षा मनोविज्ञान का मूल उद्श्य है – विद्यार्थियों योग्यताओं एवं क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उनकेद्वारा किसी बात को सीखे जाने से संबन्धित बात को प्रभावित करता है
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शिक्षा का सम्बन्ध है – शिक्षा के उदेश्य से और कक्षा पर्यावरण व् वातावरण से
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शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र है – व्यापक
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शिक्षा मनोविज्ञान के सामान्य उदेश्य है – बालक के व्यक्तित्व का विकास , शिक्षण कार्य में सहायता औरशिक्षण विधियों में सुधार
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“अवस्ता विशेष के अनुभवों के आधार पर ही हमें किसी को बालक, युवा एवं वृद्ध कहना चाहिए l ” यह कथन है – फ्रोबेल का
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शिक्षा मनोविज्ञान का प्रमुख उदेश्य है – बाल केन्द्रित शिक्षा का विकास
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बालक के विकास की प्रक्रिया कब शुरू होती है – जन्म से
पूर्व
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विकास की प्रक्रिया – जीवन पर्यन्त
चलती है।
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सामान्य रूप से विकास की कितनी अवस्थाएं होती हैं – पांच
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”वातावरण में सब बाह्य तत्व आ जाते हैं जिन्होंने व्यक्ति को जीवन आरंभ करने के समय से प्रभावित किया है।” यह परिभाषा किसकी है – वुडवर्थ की
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”वंशानुक्रम व्यक्ति की जन्मजात विशेषताओं का पूर्ण योग है –
बी.एन.झा
का
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बंशानुक्रम के निर्धारक होते हैं – जीन्स
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कौन-सी विशेषता विकास पर लागू नहीं होती है – विकास को
स्पष्ट इकाइयों
में मापा
जा सकता
है।
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शैशव काल का नियत समय है – जन्म से
5-6 वर्ष तक
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बालक की तीव्र बुद्धि का विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है – विकास सामान्य
से तीव्र
होता है।
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विकास एक प्रक्रिया है – निरन्तर
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बाल्यावस्था में मस्तिष्क का विकास हो जाता है : – 90 प्रतिशत
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अन्तर्दर्शन विधि में बल दिया जाता है – स्वयं के
अध्ययन पर
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बालक को आनन्ददायक सरल कहानियों द्वारा नैतिक शिक्षा प्रदान करनी चाहिए। यह कथन है – कोलेसनिक का
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विकास के सन्दर्भ में मैक्डूगल ने – मूल प्रवृत्यात्मक
व्यवहार का
विश्लेषण किया।
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जब हम किसी भी व्यक्ति के विकास के विषय में चिन्तन करते हैं तो हमारा आशय – उसकी कार्यक्षमतासे
होता है,
उसकी परिपक्वता
से होता
है, उसकी
शक्ति ग्रहण
करने से
होता है।
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संवेगात्मक विकास में किस अवस्था में तीव्र परिवर्तन होता है – किशोरावस्था
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वृद्धि और विकास है – एक-दूसरे
के पूरक
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चारित्रिक विकास का प्रतीक है – उत्तेजना
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विकासात्मक पद्धति को कहते हैं – उत्पत्ति मूलक
विधि
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मानसिक विकास के लिए अध्यापक का कार्य है – बालकों को
सीखनेके पूरे-पूरे अवसर
प्रदान करें।
छात्र-छात्राओं
के शारीरिक
स्वास्थ्य की
ओर पूर-पूरा ध्यान
दें। व्यक्तिगत
भेदों की
ओर ध्यान
देते हुए
उनके लिए
समुचित वातावरण
की व्यवस्था
करें।
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वाटसन ने नवजात शिशु में मुख्य रूप से किन संवेगों की बात कही है – भय, क्रोध
व स्नेह
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किशोरावस्था की मुख्य समस्याएं हैं – शारीरिक विकास
की समस्याएं,
समायोजन की
समस्याएं, काम
और संवेगात्मक
समस्याएं
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शैशवावस्था है – जन्म
से 7 वर्ष
तक
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शिशु का विकास प्रारम्भ होता है – गर्भकाल में
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बाल्यावस्था के लिए पर्याप्त नींद होती है – 8 घण्टे
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बालिकाओं की लम्बाई की दृष्टि से अधिकतम आयु है – 16 वर्ष
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बालक के विकास को जो घटक प्रेरित नहीं करता है, वह है – वंशानुक्रम या वातावरण दोनो ही नहीं
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किसके विचार से शैशवावस्था में बालक प्रेम की भावना, काम प्रवृति पर आधारित होती है – फ्रायड
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रॉस ने विकास ने विकास क्रम के अन्तर्गत किशोरावस्था का काल निर्धारित किया है – 12 से 18 वर्ष
तक
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किशोरावस्था की प्रमुख विशेषता नहीं हैं – मानसिक विकास
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बालकों के विकास की किस अवस्था को सबसे कठिन काल के रूप में माना जाता है – किशोरावस्था Bal Vikas Shiksha Shastra Notes
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उत्तर बाल्याकाल का समय कब होता है – 6 से 12 वर्ष
तक
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बाल्यावस्था की प्रमुख विशेषता नहीं है – अन्तर्मुखी व्यक्तित्व
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संवेगात्मक विकास में किस अवस्था में तीव्र परिवर्तन होता है – किशोरावस्था
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विकासवाद के समर्थक हैं – डिके एवं
बुश, गाल्टन,
डार्विन
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विकास का तात्पर्य है – वह प्रक्रिया
जिसमें बालक
परिपक्वता की
ओर बढ़ता
है।
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Age of Puberty कहलाता है – पूर्ण
किशोरावस्था
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व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को कहते है – अभिवृद्धि
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बालक के विकास की प्रक्रिया एवं विकास की शुरूआत होती है – जन्म से
पूर्व
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”विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में नवीन विशेषताएं और नवीन योग्यताएं प्रकट होती है।” यह कथन है – हरलॉक का
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शैक्षिक दृष्टि से बाल विकास की अवस्थाएं है – शैशवावस्था, बाल्यावस्था,
किशोरावस्था
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स्किनर का मानना है कि ”विकास के स्वरूपों में व्यापक वैयक्तिक भिन्नताएं होती हैं। यह विचार विकास के किस सिद्धांत के संदर्भ में हैं – व्यक्तिगत भिन्नता
का सिद्धान्त
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मनोविश्लेषणवाद (Psyco Analysis) के जनक थे – फ्रायड
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”मुझे बालक दे दीजिए। आप उसे जैसा बनाना चाहते हों, मैं उसे वैसा ही बना दूंगा।” यह कहा था – वाटसन ने
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सिगमण्ड फ्रायड के अनुसार, निम्न में से मन की तीन स्थितियों हैं – चेतन, अद्धचेतन,
अचेतन
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इड (ID), ईगो (Ego), एवं सुपर इगो (Super Ego)
को मानव की संरचना का अभिन्न भाग मानता है – फ्रायड
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केवल दो प्रकार की मूल प्रवृत्ति है – मृत्यु एवं जीवन। यह विचार है – फ्रायड
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रुचियों, मूल प्रवृत्तियों एवं स्वाभाविक संवेगों का स्वस्थ विकास हो सकता है यदि – वातावरण जिसमें
वह रहता
है, स्वस्थ
हो
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मूल प्रवृत्ति की प्रमुख विशेषता पायी जाती है – समस्त प्राणियों
में पायी
जाती है,
यह जन्मजात
एवं प्रकृति
प्रदत्त होती
है।
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व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को कहते हैं – अभिवृद्धि
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