बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र - Child Development and Pedagogy [ UPTET CTET MP Samvida Exams 2018 Special PART-3]

·      किशोर की शिक्षा में किस बात पर विशेष ध्यानाकर्षण की आवश्यकता होती है यौन शिक्षा पर, पूर्ण व्यावसायिक शिक्षा पर, पर्याप्त मानसिक विकास पर

·      किशोरावस्था की विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप में व्यक्त करने वाला एक शब्द है परिवर्तन

·      किशोरावस्था प्राप्त हो जाने पर, निम्न में से कौन-सा गुण बालक में नहीं आता है अधिक समायोजन का

·      किशोरावस्था के विकास को परिभाषित करने के लिए बिग एंड हण्ट ने किस शब्द को महत्वपूर्ण माना हैपरिवर्तन

·      किशोरावस्था में बालकों में सामाजिकता के विकास के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य हैवे परिवार के कठोर नियन्त्रण में रहना पसन्द करते हैं।

·      निम्न में कौनसा कारक किशोरावस्था में बालक के विकास को प्रभावित करता है खान-पान, वंशानुक्रम, नियमित दिनचर्या Bal Vikas Shiksha Shastra Notes

·      दिवास्वप्नकिस संगठन तन्त्र में विकसित रूप प्राप्त करता है पलायन

·      बालक की शक्ति का वह अंश जो किसी काम में नहीं आता है, वह खेलों के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है।यह तथ्य कौन-सा सिद्धान्त कहलाता है अतिरिक्त शक्तिका सिद्धान्त

·      निरंकुश राजतन्त्र में समाजीकरण की प्रक्रिया होगी मन्द

·      बालक के समाजीकरण में भूमिका होती है परिवार की, विद्यालय की, परिवेश की

·      जिस बुद्धि का कार्य सूक्ष्य तथा अमूर्त प्रश्नों का चिन्तन तथा मनन द्वारा हल करना है, वह है अमूर्त बुद्धि

·      किशोरावस्था में रुचियां होती है सामाजिक रूचियां, व्यावसायिक रूचियां, व्यक्तिगत रूचियां

·      जिस विधि के द्वारा बालक को आत्म-निर्देशन के माध्य से बुरी आदतों को छुड़वाने का प्रयास किया जाता है, वह विधि है आत्मनिर्देश विधि

·      किस स्थिति में समाजीकरण की प्रक्रिया तीव्र होगी धर्मनिरपेक्षता

·      संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास के साथ-साथ चलने की प्रक्रिया को किस विद्वान ने स्वीकार किया हैक्रो एण्ड क्रो

·      खेल के मैदान को किस विद्वान ने चरित्र निर्माण का स्थल माना है स्किनर तथा हैरीमैन ने

·      चरित्र को निश्चित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है मनोरंजन संबंधी कारक

·      समाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करते है शिक्षा, समाज का स्वरूप, आर्थिक स्थिति

·      सामान्य बुद्धि बालक प्राय: किस अवस्था में बोलना सीख जाते हैं – 11 माह

·      पोषाहार योजना सम्बन्धित है मिड डे मील योजना से

·      मिड डे मील योजना का प्रमुख संबंध है केन्द्र से

·      मिड डे मील योजना का प्रमुख लक्ष्य हैबालक को पोषण प्रदान करना।

·      सामान्य ऊर्जा में पोषण का अर्थ माना जाता है सन्तुलित भोजन से

·      पोषण के प्रमुख पक्ष हैंसन्तुलित भोजन, नियमित भोजन

·      पोषण का विकृत रूप कहलाता है कुपोषण

·      एक शिक्षक को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए पोषण का, पोषण के उपायों का, पोषक तत्वों का

·      पोषण का सम्बन्ध होता हैशारीरिक एवं मानसिक विकास

·      व्यापक अर्थ में पोषण का सम्बन्ध होता है सन्तुलित भोजन से, स्वास्थ्यप्रद वातावरण एवं प्रकृति से

·      पोषण का अभाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है सामाजिक विकास को

·      पोषण के अभाव में बालक का व्यवहार हो जाता है चिड़चिड़ा, अमर्यादित

·      सन्तुलित भोजन का स्वरूप निर्धारित होता है आयु वर्ग के अनुसार

·      अनुपयुक्त भोजन उत्पन्न करता है कुपोषण

·      सन्तुलित भोजन के लिए आवश्यक है शुद्धता एवं नियमितता

·      पोषण में वृद्धि के उपाय होते है भोजन से सम्बन्धित, पर्यावरण से सम्बन्धित

·      पोषण के उपायों में प्रभावशीलता के लिए आवश्यक है शिक्षक सहयोग, अभिभावक सहयोग, विद्यार्थी सहयोग

·      निम्नलिखित में कौन-सी विशेषता पोषण से सम्बन्धित है सन्तुलित भोजन

·      सन्तुलित भोजन के साथ पोषण के लिए आवश्यक है स्वास्थ्यप्रद वातावरण, उचित व्यायाम, खेलकूद

·      वह उपाय जो पोषण पर्यावरणीय उपायों से सम्बन्धित है पर्याप्त निंद्रा, पर्याप्त व्यायाम, स्वास्थ्यप्रद वातावरण

·      सन्तुलित भोजन की तालिका में मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों की स्थिति होती है समान या असमान दोनों की नहीं।

·      1 से 3 वर्ष के बालक के लिए अन्न होना चाहिए – 150 ग्राम

·      7 से 9 वर्ष के मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों के लिए अन्न होना चाहिए – 250 ग्राम

·      7 से 9 वर्ष के बाल को किस स्वरूप के लिए 75 ग्राम हरी सब्जियों की आवश्यकता होती हैशाकाहारी एवं मांसाहारी दोंनों के लिए

·      सन्तुलित भोजन की तालिका में 1 से 9 वर्ष के लिए फलों की तालिका में वजन होता हैएक समान Bal Vikas Shiksha Shastra Notes

·      सन्तुलित भोजन में पोषक तत्व होते है प्रोटीन, विटामिन, वसा

·      प्रोटीन सामान्य रूप से होती है दो प्रकार की

·      मांस से प्राप्त प्रोटीन को कहते है जन्तु जन्य प्रोटीन

·      कौन-सा स्रोत वनस्पतिजन्य प्रोटीन का है जौ

·      क्वाशियरकर नामक रोग उत्पन्न होता है प्रोटीन की कमी से

·      गन्ने के रस, अंगूर तथा खजूर से प्रमुख रूप से प्राप्त होती है कार्बोज

·      कार्बोज की अधिकता से कौन सा रोग उत्पन्न होता है मोटापा, बदहजमी

·      वसा के प्रमुख स्रोत हैं वनस्पति तेल सूखे मेवे

·      शरीर को अधिक शक्ति प्रदान करता है वसा

·      खनिज लवणों की कमी से रक्त को नहीं मिल पाता है हीमोग्लोबिन

·      घेंघा नामक रोग उत्पन्न होता हैआयोडिन अथवा खनिज लवण की कमी से

·      विटामिन का आविष्कार हुआ थाउन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ में

·      विटामिन की कमी से बालकों में कौंन-सा रोग होता है रतौंधी

·      विटामिन बी की कमी से होता है बेरी-बेरी रोग

·      पेलाग्रा रोग किस विटामिन की कमी से होता है बी

·      बी काम्पलेक्स कहा जाता है – B1, B2, B2 को

·      विटामिनसीकी कमी से कौन-सा रोग होता है स्कर्वी

·      विटामिन सी का प्रमुख स्त्रोत है आंवला

·      स्त्रियों में मृदुलास्थि रोग किस विटामिन की कमी से होता है विटामिन डी

·      विटामिन डी की कमी से उत्पन्न होता है सूखा रोग

·      सूखा रोग पाया जाता है बालिकाओं में

·      विटामिन की कमी से स्त्रियों में सम्भावना होती है बांझपन, गर्भपात

·      विटामिन की कमी से उत्पन्न होने वाला रोग है नपुंसकता

·      विटामिन K का प्रमुख स्त्रोत है केला, गोभी, अण्डा

·      विटामिनकेकी सर्वाधिक उपयोगिता होती है गर्भिणी स्त्री के लिए, स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए

·      रक्त का थक्का जमने का रोग किस विटामिन के अभाव से उत्पन्न होता है विटामिनके

·      जल हमारे शरीर में कितने प्रतिशत है – 70 प्रतिशत

·      दूषित जल के पीने से उत्पन्न रोग है पीलिया, डायरिया

·      कार्य करने के लिए किस पदार्थ की आवश्यकता होती है कार्बोज की, कार्बोहाइड्रेट की

·      अध्यापक को पोषक के ज्ञान की आवश्यकता होती है बाल विकास के लिए, छात्रों के रोगों की जानकारी के लिए, अभिभावकों को पोषण का ज्ञान प्रदान कराने के लिए।

·      अभिभावकों को पोषण का ज्ञान कराने का सर्वोत्तम अवसर होता है शिक्षकअभिभावक गोष्ठी Bal Vikas Shiksha Shastra Notes

·      पोषण की क्रिया को बाल विकास से सम्बद्ध करने के लिए आवश्यक है निरन्तरता

·      शारीरिक विकास के लिए निरन्तरता के रूप में उपलब्ध होना चाहिए सन्तुलित भोजन, उचित व्यायाम

·      अनिरन्तरता का विकास प्रक्रिया में प्रमुख कारक है साधनों की अनिरन्तरता

·      एक बालक को सन्तुलित भोजन की उपलब्धता सप्ताह में दो दिन होती है। इस अवस्था में उस बालक का विकास होगा अनियमित

·      साधनों की निरन्तरता में बालक विकास की गति को बनाती है तीव्र

·      साधनों की अनिरन्तरता बाल विकास को बनाती है मंद

·      एक बालक में विद्यालय के प्रथम दिन अध्यापक एवं विद्यालय के प्रति अरूचि उत्पन्न हो जाती है तो उसका प्रारम्भिक अनुभव माना जायेगा दोषपूर्ण

·      सर्वोत्तम विकास के लिए प्रारम्भिक अनुभवों का स्वरूप होना चाहिए सुखद

·      एक बालक प्रथम अवसर पर एक विवाह समारोह में जाता है वहां उसको अनेक प्रकार की विसंगतियां दृष्टिगोचर होती हैं तो माना जायेगा कि बालक का सामाजिक विकास होगा मंद गति से

·      शिक्षण कार्य में बालक के प्रारम्भिक अनुभव को उत्तम बनाने का कार्य करने के लिए शिक्षक को प्रयोग करना चाहिए शिक्षण सूत्रों का

·      परवर्ती अनुभवों का सम्बन्ध होता है परिणाम से

·      परवर्ती अनुभव का प्रयोग किया जा सकता है विकासकी परिस्थिति निर्माण में, विकास मार्ग को प्रशस्त करने में

·      बाल केन्द्रित शिक्षा में प्राथमिक स्तर पर सामान्यत: किस विधि का प्रयोग उचित माना जायेगा खेल विधि

·      बाल केन्द्रित शिक्षा का प्रमुख आधार है बालक का केन्द्र मानना

·      बाल केन्द्रित शिक्षा में किसकी भूमिका गौण होती है शिक्षक की

·      बाल केन्द्रित शिक्षा में प्रमुख भूमिका होती है बालक की

·      बाल केन्द्रित शिक्षा का उद्देश्य होता है बालक की रूचियों का ध्यान, अन्तर्निहित प्रतिभाओं का विकास, गतिविधियों का विकास

·      बाल केन्द्रित शिक्षा में शिक्षा प्रदान की जाती है कविताओं एवं कहानियों के रूप में

·      बाल केन्द्रित शिक्षा में प्रमुख स्थान दिया जाता है गतिविधियों एवं प्रयोगों को

·      प्रगतिशील शिक्षा का आधार होता है वैज्ञानिकता तकनीकी

·      शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा

·      शिक्षा में प्राथमिक स्तर पर खेलों का प्रयोग माना जाता है बाल केन्द्रित शिक्षा

·      बालकों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना उद्देश्य है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा का

·      शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण यन्त्रों का प्रयोग किसकी देन माना जाता है प्रगतिशील शिक्षा की

·      समाज में अन्धविश्वास एवं रूढि़वादिता की समाप्ति के लिए आवश्यक है प्रगतिशील शिक्षा

·      शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाना उद्देश्य है बाल केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा का

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