·
किशोर की शिक्षा में किस बात पर विशेष ध्यानाकर्षण की आवश्यकता होती है – यौन शिक्षा
पर, पूर्ण
व्यावसायिक शिक्षा
पर, पर्याप्त
मानसिक विकास
पर
·
किशोरावस्था की विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप में व्यक्त करने वाला एक शब्द है – परिवर्तन
·
किशोरावस्था प्राप्त हो जाने पर, निम्न में से कौन-सा गुण बालक में नहीं आता है – अधिक समायोजन
का
·
किशोरावस्था के विकास को परिभाषित करने के लिए बिग एंड हण्ट ने किस शब्द को महत्वपूर्ण माना है – परिवर्तन
·
किशोरावस्था में बालकों में सामाजिकता के विकास के सन्दर्भ में कौन-सा कथन असत्य है – वे परिवार
के कठोर
नियन्त्रण में
रहना पसन्द
करते हैं।
·
निम्न में कौनसा कारक किशोरावस्था में बालक के विकास को प्रभावित करता है – खान-पान,
वंशानुक्रम, नियमित
दिनचर्या Bal Vikas Shiksha Shastra Notes
·
‘दिवास्वप्न’ किस संगठन तन्त्र में विकसित रूप प्राप्त करता है – पलायन
·
”बालक की शक्ति का वह अंश जो किसी काम में नहीं आता है, वह खेलों के माध्यम से बाहर निकाल दिया जाता है।” यह तथ्य कौन-सा सिद्धान्त कहलाता है – अतिरिक्त शक्तिका
सिद्धान्त
·
निरंकुश राजतन्त्र में समाजीकरण की प्रक्रिया होगी – मन्द
·
बालक के समाजीकरण में भूमिका होती है – परिवार की,
विद्यालय की,
परिवेश की
·
जिस बुद्धि का कार्य सूक्ष्य तथा अमूर्त प्रश्नों का चिन्तन तथा मनन द्वारा हल करना है, वह है – अमूर्त बुद्धि
·
किशोरावस्था में रुचियां होती है – सामाजिक रूचियां,
व्यावसायिक रूचियां,
व्यक्तिगत रूचियां
·
जिस विधि के द्वारा बालक को आत्म-निर्देशन के माध्य से बुरी आदतों को छुड़वाने का प्रयास किया जाता है, वह विधि है – आत्मनिर्देश विधि
·
किस स्थिति में समाजीकरण की प्रक्रिया तीव्र होगी – धर्मनिरपेक्षता
·
संवेगात्मक एवं सामाजिक विकास के साथ-साथ चलने की प्रक्रिया को किस विद्वान ने स्वीकार किया है – क्रो एण्ड
क्रो
·
खेल के मैदान को किस विद्वान ने चरित्र निर्माण का स्थल माना है – स्किनर तथा
हैरीमैन ने
·
चरित्र को निश्चित करने वाला महत्वपूर्ण कारक है – मनोरंजन संबंधी
कारक
·
समाजीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करते है – शिक्षा, समाज
का स्वरूप,
आर्थिक स्थिति
·
सामान्य बुद्धि बालक प्राय: किस अवस्था में बोलना सीख जाते हैं – 11 माह
·
पोषाहार योजना सम्बन्धित है – मिड डे
मील योजना
से
·
मिड डे मील योजना का प्रमुख संबंध है – केन्द्र से
·
मिड डे मील योजना का प्रमुख लक्ष्य है – बालक को
पोषण प्रदान
करना।
·
सामान्य ऊर्जा में पोषण का अर्थ माना जाता है – सन्तुलित भोजन
से
·
पोषण के प्रमुख पक्ष हैं – सन्तुलित भोजन,
नियमित भोजन
·
पोषण का विकृत रूप कहलाता है – कुपोषण
·
एक शिक्षक को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए – पोषण का,
पोषण के
उपायों का,
पोषक तत्वों
का
·
पोषण का सम्बन्ध होता है – शारीरिक एवं
मानसिक विकास
·
व्यापक अर्थ में पोषण का सम्बन्ध होता है – सन्तुलित भोजन
से, स्वास्थ्यप्रद
वातावरण एवं
प्रकृति से
·
पोषण का अभाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है – सामाजिक विकास
को
·
पोषण के अभाव में बालक का व्यवहार हो जाता है – चिड़चिड़ा, अमर्यादित
·
सन्तुलित भोजन का स्वरूप निर्धारित होता है – आयु वर्ग
के अनुसार
·
अनुपयुक्त भोजन उत्पन्न करता है – कुपोषण
·
सन्तुलित भोजन के लिए आवश्यक है – शुद्धता एवं
नियमितता
·
पोषण में वृद्धि के उपाय होते है – भोजन से
सम्बन्धित, पर्यावरण
से सम्बन्धित
·
पोषण के उपायों में प्रभावशीलता के लिए आवश्यक है – शिक्षक सहयोग,
अभिभावक सहयोग,
विद्यार्थी सहयोग
·
निम्नलिखित में कौन-सी विशेषता पोषण से सम्बन्धित है – सन्तुलित भोजन
·
सन्तुलित भोजन के साथ पोषण के लिए आवश्यक है – स्वास्थ्यप्रद वातावरण,
उचित व्यायाम,
खेलकूद
·
वह उपाय जो पोषण पर्यावरणीय उपायों से सम्बन्धित है – पर्याप्त निंद्रा,
पर्याप्त व्यायाम,
स्वास्थ्यप्रद वातावरण
·
सन्तुलित भोजन की तालिका में मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों की स्थिति होती है – समान या
असमान दोनों
की नहीं।
·
1 से 3 वर्ष के बालक के लिए अन्न होना चाहिए – 150 ग्राम
·
7 से 9 वर्ष के मांसाहारी एवं शाकाहारी बालकों के लिए अन्न होना चाहिए – 250 ग्राम
·
7 से 9 वर्ष के बाल को किस स्वरूप के लिए 75 ग्राम हरी सब्जियों की आवश्यकता होती है – शाकाहारी एवं
मांसाहारी दोंनों
के लिए
·
सन्तुलित भोजन की तालिका में 1 से 9 वर्ष के लिए फलों की तालिका में वजन होता है – एक समान
Bal Vikas Shiksha Shastra Notes
·
सन्तुलित भोजन में पोषक तत्व होते है – प्रोटीन, विटामिन,
वसा
·
प्रोटीन सामान्य रूप से होती है – दो प्रकार
की
·
मांस से प्राप्त प्रोटीन को कहते है – जन्तु जन्य
प्रोटीन
·
कौन-सा स्रोत वनस्पतिजन्य प्रोटीन का है – जौ
·
क्वाशियरकर नामक रोग उत्पन्न होता है – प्रोटीन की
कमी से
·
गन्ने के रस, अंगूर तथा खजूर से प्रमुख रूप से प्राप्त होती है – कार्बोज
·
कार्बोज की अधिकता से कौन सा रोग उत्पन्न होता है – मोटापा, बदहजमी
·
वसा के प्रमुख स्रोत हैं – वनस्पति तेल
व सूखे
मेवे
·
शरीर को अधिक शक्ति प्रदान करता है – वसा
·
खनिज लवणों की कमी से रक्त को नहीं मिल पाता है – हीमोग्लोबिन
·
घेंघा नामक रोग उत्पन्न होता है – आयोडिन अथवा
खनिज लवण
की कमी
से
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विटामिन का आविष्कार हुआ था – उन्नीसवीं शताब्दी
के आरम्भ
में
·
विटामिन ए की कमी से बालकों में कौंन-सा रोग होता है – रतौंधी
·
विटामिन बी की कमी से होता है – बेरी-बेरी
रोग
·
पेलाग्रा रोग किस विटामिन की कमी से होता है – बी
·
बी काम्पलेक्स कहा जाता है – B1, B2, B2 को
·
विटामिन ‘सी’ की कमी से कौन-सा रोग होता है – स्कर्वी
·
विटामिन सी का प्रमुख स्त्रोत है – आंवला
·
स्त्रियों में मृदुलास्थि रोग किस विटामिन की कमी से होता है – विटामिन डी
·
विटामिन डी की कमी से उत्पन्न होता है – सूखा रोग
·
सूखा रोग पाया जाता है – बालिकाओं में
·
विटामिन ई की कमी से स्त्रियों में सम्भावना होती है – बांझपन, गर्भपात
·
विटामिन ई की कमी से उत्पन्न होने वाला रोग है – नपुंसकता
·
विटामिन K का प्रमुख स्त्रोत है – केला, गोभी,
अण्डा
·
विटामिन ‘के’ की सर्वाधिक उपयोगिता होती है – गर्भिणी स्त्री
के लिए,
स्तनपान कराने
वाली महिलाओं
के लिए
·
रक्त का थक्का न जमने का रोग किस विटामिन के अभाव से उत्पन्न होता है – विटामिन ‘के‘
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जल हमारे शरीर में कितने प्रतिशत है – 70 प्रतिशत
·
दूषित जल के पीने से उत्पन्न रोग है – पीलिया, डायरिया
·
कार्य करने के लिए किस पदार्थ की आवश्यकता होती है – कार्बोज की,
कार्बोहाइड्रेट की
·
अध्यापक को पोषक के ज्ञान की आवश्यकता होती है – बाल विकास
के लिए,
छात्रों के
रोगों की
जानकारी के
लिए, अभिभावकों
को पोषण
का ज्ञान
प्रदान कराने
के लिए।
·
अभिभावकों को पोषण का ज्ञान कराने का सर्वोत्तम अवसर होता है – शिक्षक–अभिभावक
गोष्ठी Bal Vikas Shiksha Shastra Notes
·
पोषण की क्रिया को बाल विकास से सम्बद्ध करने के लिए आवश्यक है – निरन्तरता
·
शारीरिक विकास के लिए निरन्तरता के रूप में उपलब्ध होना चाहिए – सन्तुलित भोजन, उचित व्यायाम
·
अनिरन्तरता का विकास प्रक्रिया में प्रमुख कारक है – साधनों की
अनिरन्तरता
·
एक बालक को सन्तुलित भोजन की उपलब्धता सप्ताह में दो दिन होती है। इस अवस्था में उस बालक का विकास होगा – अनियमित
·
साधनों की निरन्तरता में बालक विकास की गति को बनाती है – तीव्र
·
साधनों की अनिरन्तरता बाल विकास को बनाती है – मंद
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एक बालक में विद्यालय के प्रथम दिन अध्यापक एवं विद्यालय के प्रति अरूचि उत्पन्न हो जाती है तो उसका प्रारम्भिक अनुभव माना जायेगा – दोषपूर्ण
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सर्वोत्तम विकास के लिए प्रारम्भिक अनुभवों का स्वरूप होना चाहिए – सुखद
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एक बालक प्रथम अवसर पर एक विवाह समारोह में जाता है वहां उसको अनेक प्रकार की विसंगतियां दृष्टिगोचर होती हैं तो माना जायेगा कि बालक का सामाजिक विकास होगा – मंद गति
से
·
शिक्षण कार्य में बालक के प्रारम्भिक अनुभव को उत्तम बनाने का कार्य करने के लिए शिक्षक को प्रयोग करना चाहिए – शिक्षण सूत्रों
का
·
परवर्ती अनुभवों का सम्बन्ध होता है – परिणाम से
·
परवर्ती अनुभव का प्रयोग किया जा सकता है – विकासकी परिस्थिति
निर्माण में,
विकास मार्ग
को प्रशस्त
करने में
·
बाल केन्द्रित शिक्षा में प्राथमिक स्तर पर सामान्यत: किस विधि का प्रयोग उचित माना जायेगा – खेल विधि
·
बाल केन्द्रित शिक्षा का प्रमुख आधार है – बालक का
केन्द्र मानना
·
बाल केन्द्रित शिक्षा में किसकी भूमिका गौण होती है – शिक्षक की
·
बाल केन्द्रित शिक्षा में प्रमुख भूमिका होती है – बालक की
·
बाल केन्द्रित शिक्षा का उद्देश्य होता है – बालक की
रूचियों का
ध्यान, अन्तर्निहित
प्रतिभाओं का
विकास, गतिविधियों
का विकास
·
बाल केन्द्रित शिक्षा में शिक्षा प्रदान की जाती है – कविताओं एवं
कहानियों के
रूप में
·
बाल केन्द्रित शिक्षा में प्रमुख स्थान दिया जाता है – गतिविधियों एवं
प्रयोगों को
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प्रगतिशील शिक्षा का आधार होता है – वैज्ञानिकता व
तकनीकी
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शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग माना जाता है – प्रगतिशील शिक्षा
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शिक्षा में प्राथमिक स्तर पर खेलों का प्रयोग माना जाता है – बाल केन्द्रित
शिक्षा
·
बालकों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना उद्देश्य है – बाल केन्द्रित
शिक्षा एवं
प्रगतिशील शिक्षा
का
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शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण यन्त्रों का प्रयोग किसकी देन माना जाता है – प्रगतिशील शिक्षा
की
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समाज में अन्धविश्वास एवं रूढि़वादिता की समाप्ति के लिए आवश्यक है – प्रगतिशील शिक्षा
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शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाना उद्देश्य है – बाल केन्द्रित
शिक्षा एवं
प्रगतिशील शिक्षा
का
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